इंटरनेट क्रांति के इस युग में एक ओर जहां सूचनाओं का अबाध और तेजी से प्रसार बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर इसने खबरों की दुनिया को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। इसीलिए वेब पत्रकारिता का तेजी से बोलबाला हो रहा है। इस बात में कोई दो रायContinue Reading

आज कल हर कोई एक ऐसा करियर बनाना चाहता है जिसमे वो कुछ रचनात्मक कर सके। एक ऐसा करियर जो उसके गुणों और काबिलियत और भी निखार दे। एक ऐसा करियर जो उसके पसंदीदा विषय से जुड़ा हो। हर किसी के लिए उसका पसंदीदा विषय अलग अलग हो सकता है।Continue Reading

न सिर्फ भारत में बल्कि विश्वभर में कलम को तलवार से भी ज्यादा ताकतवर और तलवार की धार से भी ज्यादा प्रभावी माना गया है क्योंकि इसी की सजगता के कारण भारत सहित दुनियाभर के अनेक देशों में पिछले कुछ दशकों में कई बड़े-बड़े घोटालों का पदार्फाश हो सका। यहContinue Reading

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर साल तीन मई को मनाया जाता है। प्रेस किसी भी समाज का आइना होता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता बुनियादी जरूरत है। प्रेस के माध्यम से हम देश दुनिया में घटित होने वाली गतिविधियों से अवगत होकर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं।Continue Reading

♦‘संपादक’ शब्द की व्याख्या की बजाय मैं उसके कार्य से अपनी बात शुरू करना चाहूंगा। जिस तरह हर व्यक्ति, समाज और देश का अपना एक खास व्यक्तित्व होता है, जिसे प्रोफाइल कहते हैं। उसी तरह हर अखबार, हर पत्रिका या टीवी न्यूज चैनल का भी अपना एक अलग व्यक्तित्व होताContinue Reading

  1. समाचार किसी कानून का उल्लंघन तो नहीं करता है।  2.  समाचार नीति के अनुरूप हो।  3.  समाचार तथ्याधारित हो।  4.  समाचार को स्थान तथा उसके महत्व के अनुरूप विस्तार देना।  5.  समाचार की भाषा पुष्ट एवं प्रभावी है या नहीं। यदि भाषा नहीं है तो उसे   पुष्टContinue Reading

एक दौर था, जब बच्चे सबसे पहले रोजगार के रूप में सिविल सेवाओं को चुनते थे, फिर उनकी पसंद होती थी बैंक की नौकरी और उसके बाद अन्य सेवाएं। किंतु आज मीडिया के आकर्षण से कोई नहीं बचा है। मीडिया जहां एक ओर जनता की सशक्त आवाज बन कर उभराContinue Reading

छपाई की पहली मशीन भारत में 1674 में पहुंचायी गयी थी। मगर भारत का पहला अख़बार इस के 100 साल बाद, 1776 में प्रकाशित हुआ। इस का प्रकाशक ईस्ट इंडिया कंपनी का भूतपूर्व अधिकारी विलेम बॉल्ट्स था। यह अख़बार स्वभावतः अंग्रेज़ी भाषा में निकलता था तथा कंपनी व सरकार के समाचार फैलाता था। सबContinue Reading

प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। परिणाम स्वरूप चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई जिसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया।Continue Reading

भारत में पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है। अकबर इलाहाबादी ने इसकी ताकत एवं महत्व को इन शब्दों में अभिव्यक्ति दी है कि ‘न खींचो कमान, न तलवार निकालो, जब तोप हो मुकाबिल तब अखबार निकालो। उन्होंने इन पंक्तियों के जरिए प्रेस को तोप और तलवार से भीContinue Reading