जानिए, आज की युवा पीढ़ी कैसे करती है शिव की भक्ति

भगवान शिव का प्रिय महीना श्रावम मास की शुरुआत हो चुकी है. सभी शिवभक्त शिव की भक्ति में जुट गए हैं. सावन के महीने में कोई शिव पर जल चढ़ाता है तो कोई बेल पत्र, तो कुछ लोग व्रत रखकर शिव के प्रसन्न करते हैं. महादेव के भक्तों में युवाओं पर शिव भक्ति सर चढ़ के बोलती है. लेकिन युवाओं की भक्ति का अंदाज ही कुछ निराला होता है. कोई बोलता है दूध चढ़ाओ, कोई बोलता है दूध गरीबो में बांटो, कोई बोलता है कांवड़ में चलो, कोई बोलता है भस्मारती करो, सब कुछ बहुत सुंदर है ,मनोरम है. पर कभी आप ने ये सोचा है कि धर्म अध्यात्म का मूल है ऋषि परम्परा और धर्म शास्त्र. आज धर्म शास्त्र के अनुरूप क्या भगवान की भक्ति हो रही है. ये बड़ा प्रश्न है क्या आज के युवा धर्म की मर्यादा के अनुरूप भक्ति कर रहे हैं.

आज के युवा वर्ग की भक्ति ऐसी है, जिसमें मर्यादाएं नहीं हैं. आज का युवा भगवान के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है. भगवान की पूजा एक दिखावा बन के रह गया है. हर कोई भगवा रंग का कुर्ता पहन अपने आप को महादेव का भक्त कहता है. भगवान के साथ-साथ हमारी प्रकृति के साथ भी युवा पीढ़ी खिलवाड़ कर रही है. इन दिनों प्लास्टिक का इस्तेमाल हमारी प्रकृति को नुकसान पहुंचाती हैं. युवा पीढ़ी भक्ति के नाम पर ढोंग करती है. कहीं से भी जल भरना, कहीं भी गली मोहल्ले गांव के मंदिर में चढ़ा देना, बोल बम के जयकारे लगाना, फोटो लेना,सेल्फी लेना, साथ ही साथ मादक द्रव्यों का सेवन का सेवन करना ही युवाओं के लिए भक्ति है. किस धर्म ग्रन्थ में लिखा है- शिव भक्त गांजा पिये, भांग खाये ,दम लगाएं.

राजनीति की बात करें तो, नेताओं की भक्ति भी फोटो खिंचाने तक ही सीमित रह गई है. भक्ति भाव और धर्म से किसी को कोई मतलब नहीं है. कई कावड़ यात्रा में भैरव भक्त घुस आते है दारू के नशे में चल देते हैं. जबकि जूते पहनकर कावड़ उठाना गलत है. कांवड को कहीं भी रख देना अशुभ होता है. नेताओं को बस अपनी शक्ति का प्रदर्शन करके राजनीतिक आका को खुश करना होता है. राजनीति में आगे बढ़ने के लिए ,वोटों के लिए राजनीति में धर्म का तड़का लगाना है. मजे की बात ये है कि धर्म प्रेमी युवा भी निकल पड़ता है इस तरह की कावड़ में. धर्म का राजनीति में बस यही उपयोग है. अब विचार आप को करना है आप को धर्म की परंपरा निभानी है। भगवान की भक्ति करनी है या दिखावा राजनीति करनी है.

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