सूर्य और चंद्र ग्रहण से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और तथ्‍य

भारत में ग्रहण को लेकर कई अंधविश्वास भी हैं, जबकि विज्ञान ग्रहण को लेकर किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानता. विज्ञान के मुताबिक ग्रहण पूरी तरह खगौलीय घटना है.

हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण का बहुत महत्व है. शास्त्रों में भी ग्रहण से जुड़ी कई बातें कहीं गई है. भारत में ग्रहण को लेकर कई अंधविश्वास भी हैं, जबकि विज्ञान ग्रहण को लेकर किसी भी अंधविश्वास को नहीं मानता. विज्ञान के मुताबिक ग्रहण पूरी तरह खगौलीय घटना है. आइए जानते हैं कब और कैसे होता है ग्रहण:

सूर्य ग्रहण:
(1) जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य की चमकती सतह चंद्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ती है.

(2) चंद्रमा की वजह से जब सूर्य ढकने लगता है तो इस स्थिति को सूर्यग्रहण कहते हैं.

(3) जब सूर्य का एक भाग छिप जाता है तो उसे आंशिक सूर्यग्रहण कहते हैं.

(4) जब सूर्य कुछ देर के लिए पूरी तरह से चंद्रमा के पीछे छिप जाता है तो उसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं.

(5) पूर्ण सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को ही होता है.

चंद्रग्रहण:
(1) जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो सूर्य की पूरी रोशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती है. इसे चंद्रग्रहण कहते हैं.

(2) जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं तो चंद्रग्रहण की स्थिति होती है.

(3) चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात में ही होता है.

(4) एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपछाया से चंद्रमा गुजरता है, तभी चंद्रग्रहण लगता है.

(5) सूर्यग्रहण की तरह ही चंद्रग्रहण भी आंशिक और पूर्ण हो सकता है.

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