इन दो निर्दलीय विधायकों को कमलनाथ के मंत्रिमंडल में मिल सकती है जगह

मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को साधने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. बताया जाता है कि कमलनाथ सरकार मंत्रिमंडल का विस्तार कर उन्हें मंत्री पद के जरिये खुश कर सकती है. इसमें जिन दो निर्दलीय विधायकों के नाम चर्चा में हैं उनमें बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह और खरगोन के भगवानपुरा विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक केदार डाबर शामिल हैं.

सुरेंद्र सिंह ठाकुर को मिला भरोसा

निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने का भरोसा पार्टी ने दिया है. उन्‍होंने कहा कि वह मंत्री बनने को लेकर सौ फीसद आश्‍वस्‍त हैं. बता दें कि सुरेंद्र सिंह ने लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी को कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था. बाद में उन्होंने सीएम कमलनाथ से मुलाकात करने के बाद नामांकन वापस ले लिया था. अब माना जा रहा है कि सीएम कमलनाथ उन्हें मंत्री पद से नवाज कर उनकी नाराजगी को दूर कर सकते हैं.

केदार डाबर हैं दूसरा नाम
दूसरा नाम खरगोन के भगवानपुरा विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक केदार डाबर का है. उन्होंने भी यह दावा किया है कि उन्हें मंत्रिमंडल में जरूर शामिल किया जाएगा. भोपाल में मंगलवार को कांग्रेस विधायकों की बैठक में शामिल निर्दलीय विधायक डाबर ने कहा कि क्षेत्र की जनता चाहती है कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जाए. क्षेत्र के विकास के लिए मंत्रिमंडल में जगह मिलना जरूरी है. आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में उनका मंत्री बनना तय है.

नेता प्रतिपक्ष की फ्लोर टेस्ट की मांग

बता दें कि मध्‍य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल को चिट्ठी लिखकर फ्लोर टेस्‍ट कराने की मांग की थी. इसके बाद मध्‍य प्रदेश का सियासी पारा अचानक से ऊपर चढ़ गया. बाद में मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने भी कहा कि उनकी सरकार विधानसभा में विश्‍वास मत हासिल करने की प्रक्रिया से गुजरने को तैयार है. बता दें कि बीजेपी के कई नेताओं ने कमलनाथ सरकार के अल्‍पमत में होने का दावा किया है.

कमलनाथ का दावा, कांग्रेस के दस विधायकों को दिया गया प्रलोभन

मध्य प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता की हलचल के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि मुझे अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. कमलनाथ ने यह भी कहा कि दस विधायकों ने उन्हें बताया है कि फोन के जरिए प्रलोभन देकर उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है. लेकिन हमें अपने विधायकों पर पूरा विश्वास है और विपक्ष अपने मंसूबों पर सफल नही होगा.

कमलनाथ ने मंगलवार को सभी मंत्री और विधायकों के साथ बैठक कर चुनाव पर चर्चा की. बैठक के बाद सीएम के इस बयान से मध्य प्रदेश का सियासी पारे में थोड़ी और हलचल हो गई है. इस बैठक में कांग्रेस सरकार के मंत्री, विधायकों के साथ सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय चारों विधायक भी शामिल हुए थे.

जब बीजेपी नेता ने कहा, ‘ऊपर से सिग्नल मिला तो गिरा देंगे कमलनाथ सरकार’

दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ था जब सोमवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने यह बयान दिया कि वे राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सत्र बुलाने की मांग करेंगे. उन्होंने दावा किया कि कई कांग्रेस के विधायक कमलनाथ सरकार से परेशान हो चुके हैं और बीजेपी के साथ आना चाहते हैं. ऐसे में सरकार ने उन्होंने कहा कि बीजेपी खरीद फरोख्त नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस के ही विधायक अब उनकी सरकार के साथ नहीं हैं. गोपाल भार्गव के इस बयान के बाद एमपी में हड़कंप मच गया.

एमपी विधानसभा का गणित

कुल 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, उसे 114 सीटें मिली थीं, हालांकि बहुमत के आंकड़े से वो दो सीटें दूर रह गई थी. बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए थीं, वहीं बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं. इसके अलावा निर्दलीय को चार, बसपा को दो सीटें और सपा को एक सीट मिली थी.

चुनाव परिणाम के दिन ही सपा और बसपा ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था और निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में थे, इस प्रकार कांग्रेस ने अपने बहुमत का आंकड़ा साबित कर दिया था और कमलनाथ मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने थे.


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