एनसीपी का कांग्रेस में होगा विलय? राहुल से मुलाकात पर आई पवार की पहली प्रतिक्रिया

कांग्रेस को लोकसभा में विपक्ष का नेता पाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं मिलीं. इसलिए अगर एनसीपी का कांग्रेस में विलय हो जाता है, तो विपक्ष का नेता पाने के लिए पर्याप्त सीटें होंगी.

अब तक दोनों दलों के नेताओं में से किसी ने भी खबर की पुष्टि नहीं की है लेकिन चर्चा जोरों पर है कि अब एनसीपी का कांग्रेस में विलय समय की मांग है. इस विलय का समर्थन करने वाले नेता दोनों दलों में हैं. लेकिन आलाकमान का रुख स्पष्ट नहीं है. लिहाजा सबके मुंह सिले हुए हैं. दोनों नेताओं की दिल्ली में मुलाकात हुई है.

हालांकि शरद पवार ने इस पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात में महाराष्ट्र चुनाव के संदर्भ में राहुल गांधी के साथ विश्लेषणात्मक चर्चा हुई. राज्य में सूखे के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिए इस्तीफा देने का कोई अन्य विकल्प नहीं है.

इस तथाकथित विलय के पक्ष में जो नेता हैं वो सूत्रों के मुताबिक ये दलील दी रहे हैं कि विलय होने पर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद दे दिया जाए, जो अब तक कांग्रेस के ग़ुलाम नबी आजाद के पास है. वहीं लोकसभा में एनसीपी के 5 सांसदों के विलय से कांग्रेस सदस्यों की संख्या भी बढ़कर 57 हो जाएगी और उसको विपक्ष के नेता का पद भी मिल जाएगा.

गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने पर अड़े राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता का पद स्वीकार करने का संकेत दिया है. एनसीपी के विलय के बाद राहुल को बाकायदा नेता विपक्ष पद मिल सकता है.
दबी जुबान से ही सही लेकिन इस विलय के समर्थक नेता कह रहे हैं कि इससे आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में स्थिति बेहद अच्छी हो जाएगी. सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा, जिसको आधार बनाकर पवार ने पार्टी बनाई थी, अब वो खत्म हो चुका है और दोनों साथ सरकार चला चुके हैं.

अब विलय होगा कि नहीं ये सिर्फ पवार और राहुल/सोनिया ही जानते हैं, जहां से इस खबर की सत्यता की जांच नहीं हो सकी है लेकिन अटकलें ज़बरदस्त हैं. अटकलें राजनीति का स्थायी हिस्सा हैं लिहाजा न तो इनको सिरे से खारिज किया जा सकता है और न ही सत्य माना जा सकता है.

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