खेल शुरू कर कमलनाथ ने क्या मोल ले लिया है कोई बड़ा सियासी खतरा ?

भाजपा के दो विधायकों से पाला बदलवाकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने क्या बड़ा सियासी खतरा मोल ले लिया है ?  इस तरह की चर्चा अब मध्यप्रदेश के सियासी हलकों में है. एक मंझा हुआ खिलाड़ी या कुशल रणनीतिकार अपना खास दांव वक्त से पहले नहीं खेलता  लेकिन कमलनाथ सरकार ने जिस तरह बेवक्त पर अपनी ताकत और दांव को उजागर कर दिया है, उसने नए खतरे की संभावना को पैदा कर दिया है.

काउंटर की तैयारी 

शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता

भाजपा के लिए यह अलार्म हो गया है और उसने डैमेज कंट्रोल की तैयारी शुरू कर दी है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने जिस तरह नाराजगी जताते हुए प्रदेश संगठन और आला नेताओं से रिपोर्ट तलब की है, उसने इस बात के संकेत दिेए हैं कि भाजपा ने काउंटर अटैक की तैयारियां शुरू कर दी हैं. सबसे पहले तो भाजपा अपने उन विधायकों की घेराबंदी कर रही है जिनकी निष्ठा संदेहास्पद है. साथ ही उन कांग्रेस विधायकों पर भी नजर है जो आए दिन कमलनाथ सरकार के खिलाफ बढ़-चढ़ कर बयान देते रहे हैं.

राजनीतिक उत्साह 
दरअसल, पूरा घटनाक्रम राजनीति से ज्यादा उत्साह में आकर किए गए खेल से भरा दिखाई देता है. ऐसा खेल जिसमें जोश- जोश में कांग्रेस ने भाजपा की ओर से आए दिन मिल रही धमकियों का जवाब दे दिया. उस दिन न तो  भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव रखा था और न ही कोई फ्लोर टेस्ट जैसी बात थी. बावजूद इसके बसपा विधायक के कहने पर दंड विधि संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस ने भाजपा के दो विधायकों को अपने पाले में कर लिया.

शिवराज तो भाषण की तैयारी में थे 
चौंकाने वाली बात तो यह है कि यह सब इतना जल्दी हो गया कि सदन में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा इसे समझ ही नहीं पाए. भाजपा ने कोई व्हिप भी जारी नहीं किया था. शिवराज तो सदन में अपना भाषण देने की तैयारी में थे.

शिवराज लाए थे 
जिन दो विधायकों शरद कोल, नारायण त्रिपाठी ने कमलनाथ सरकार के पक्ष में समर्थन दिया, दोनों विधायक पूर्व में भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं. इन दोनों ही विधायकों को शिवराज भाजपा में लेकर आए थे. संगठन और सरकार में उनकी लगातार उपेक्षा होती रही, जिसके चलते उन्होंने कमलनाथ सरकार को समर्थन दिया.

सही वक्त की तलाश 
भाजपा अब सही वक्त की तलाश में है. पार्टी हाईकमान और संघ ने नेता प्रतिपक्ष समेत तमाम नेताओं को चेतावनी दी है कि वे सरकार गिराने के अपरिपक्व बयानों से किनारा करें. कमलनाथ सरकार को घेरने की बजाय सारा ध्यान अपने पाले के विधायकों पर लगाएं. एक मु्द्दा  प्रदेश के दिग्गज नेताओं के बीच के समन्वय का भी है. जिसके कारण कांग्रेस को अपनी जगह बनाने का मौका मिला है. इस घटना ने पार्टी संगठन की कमजोरी को भी उजागर किया है, जिससे निपटने की तैयारी हो शुरू हो गई है.

फ्लोर टेस्ट नहीं था 
भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि कांग्रेस में अब विवाद खुलकर सामने आ रहे है. उन दो विधायकों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुलकर विरोध कर रहे हैं. भाजपा ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का मुद्दा ही नहीं उठाया था, बावजूद इसके यह हुआ है. अब इसका समय पर जवाब दिया जाएगा.

ट्रेलर था फिल्म बाकी है 
कांग्रेस नेता के के मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बता दिया है कि वे असली टाइगर हैं. भाजपा नेताओं की गीदड़ भभकियों से वे डरने वाले नहीं हैं. यह तो टीजर था वक्त आने पर पूरी फिल्म दिखाएंगे.

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