भारत ने फ्रांस में रिसीव किया पहला राफेल विमान,डिप्टी एयर फोर्स चीफ ने एक घंटे तक भरी उड़ान:

दीपक प्रजापति ब्यूरो चीफ

जानकारी के अनुसार विमान रिसीव करते समय फ्रांस में डिप्टी एयर फोर्स चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी राफेल विमान को लगभग एक घंटे तक हवा में उड़ाया। बता दें कि लड़ाकू विमान राफेल मीटिओर मिसाइल से लैस है , जिसकी मारक क्षमता पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों से कहीं अधिक है. इसके साथ ही SCALP से पड़ोसी देश का लगभग हर इलाका इस विमान की रेंज में होगा।
देश की वायु सेना को लंबे समय से राफेल विमान का इंतजार था. क्योंकि भारत के पास आने वाला यह सबसे आधुनिक और अधिक मारक क्षमता वाला विमान है. इन विमानों को भारत लाने में देरी हो इसलिए हो रही है कि राफेल विमानों के परीक्षण और ट्रेनिंग के लिए भारतीय पायलट इन्हें फ्रांस में कम-से-कम 1,500 घंटे उड़ाएंगे।


उड़ान के दौरान राफेल विमान SCALP मिसाइल से लैस होंगे, जो 300 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर वार कर सकती है. ट्रेनिंग और परीक्षण पूरा होने के बाद राफेल को वायुसेना के अंबाला बेस में लाया जाएगा।
राफेल एक फ्रांसीसी कंपनी डैसॉल्ट एविएशन निर्मित दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है. राफेल लड़ाकू विमानों को ‘ओमनिरोल’ विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध में अहम रोल निभाने में सक्षम हैं. ये बखूबी ये सारे काम कर सकती है-  हवाई हमला, जमीनी समर्थन, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध।
राफेल भारत का एकमात्र विकल्प नहीं था. कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माताओं ने भारतीय वायुसेना से पेशकश की थी. बाद में छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा गया. इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ -16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग -35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और रफाले शामिल थे।

✍दीपक प्रजापति ( इंदौर मध्यप्रदेश)

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