विश्व स्तरीय खिलाड़ी का दर्द, सुविधाओं की कमी से हो रहा टैलेंट का नुकसान

सतना. आधुनिक युग में लिंग भेद को लेकर चली आ रही धारणा खत्म होती नजर आ रही है. लड़कियां (Girls) किसी भी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं. लड़कियां न केवल माता पिता का सहारा बन रही हैं बल्कि परिवार और देश का नाम भी रोशन कर रही हैं. ‘नेशनल गर्ल चाइल्ड डे’ (National girl Child Day) के मौके पर सतना की विशेषता सिंह (Visheshta singh) के संघर्ष और जज़्बे को उनके कोच और सतना के लोग याद कर रहे हैं. विशेषता सिंह ने न केवल स्केटिंग (Skating) में दो बार गिनीज बुक (Guinness Book) में नाम दर्ज कराया है बल्कि स्केटिंग प्रतियोगिताओं में कई मेडल हासिल कर प्रदेश और देश का नाम भी रोशन कर चुकी हैं. नाम मात्र सुविधाओं के साथ स्केटिंग सीखकर विशेषता आज लोगों की प्रेरणास्त्रोत हैं. हालांकि उन्हें लगता है कि सुविधाओं की कमी नए टैलेंट को सामने आने से रोक रही है

नए स्केटर्स तैयार करने में परेशानी
सतना की विशेषता सिंह के नाम 96 घण्टे लगातार स्केटिंग करने का एकल रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज है. उपलब्धियों की बात करते हुए उन्होंने सुविधाओं की कमी का भी ज़िक्र किया. विशेषता ने कहा कि सतना में स्केटिंग ट्रैक न होने के बावजूद जान जोखिम में डाल कर उन्होंने गड्ढों से भरी सतना की सड़कों पर स्केटिंग की और आज इस मुकाम तक पहुंचीं हैं. हालांकि उनका कहना है कि सुविधाओं की कमी से नए स्केटर्स तैयार करने में उन्हें परेशानी आ रही है. विशेषता ने बताया कि उनकी अगुवाई में दर्जनों लड़के लड़कियां स्केटिंग का हुनर सीख रहे हैं.

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