मुल्क से बड़ा नहीं CAA का विरोध

विजया पाठक
मौजूदा समय में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समूचे देश में विरोध हो रहा है। यह विरोध किस बात का हो रहा है, किस भ्रम में हो रहा है, मेरी समझ से परे है। यह भ्रम विरोध करने वालों में भी है क्योंकि जिस बात का विरोध,विरोधी कर रहे हैं उन्हें इस कानून के विषय में आधी अधूरी जानकारी है। विरोधियों का मानना है कि इस कानून से एक संप्रदाय विशेष को हानि होगी। इन विरोधियों को मेरी सलाह है कि सबसे पहले ये लोग इस कानून को सही ढंग से अध्ययन करें और सच्चाई को समझें। वैसे भी कोई मुल्क की सुरक्षा से बड़ा नहीं हो सकता है। यह कानून देश की सुरक्षा और देशवासियों के हित से जुड़ा है। देश की सुरक्षा से समझौता करना काफी नुकसानदायक साबित होगा। विरोधियों ने भय और भ्रम की स्थिति पैदा कर पूरे देश में हिंसा,प्रदर्शन और आगजनी करवाई। पूरे देश में ऐसा माहौल निर्मित किया जैसे एक कौम का देश निकाला कर दिया। यदि कानून देश के हित में है तो इसे लागू कीजिए। राज्यों में भी इस कानून को लागू करना होगा। इस कानून को राजनीतिक चश्में से नहीं देखना चाहिए।
इस कानून में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि पाकिस्तान,बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए घुसपैठिओं के लिए है। इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं है कि भारत में रहने वाले मुस्लिम लोगों को इस कानून के दायरे में लाया जाएगा। जबकि कुछ राजनीतिक पार्टियां यह भ्रम फैला रही हैं कि इससे मुस्लिम लोगों का आगे चलकर अपनी नागरिकता सिद्ध करने में परेशानी होगी। पूरे मुल्क में यही भय की स्थिति निर्मित की जा रही है। मतलब सभी विरोधी एक भेड़चाल में चल रहे हैं। विरोधियों को पहले शरणार्थियों और घुसपैठियों में अंतर समझना होगा। यह कानून घुसपैठियों के लिए है।
यह कानून सीएए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों पर लागू होगा। यह कानून इन तीनों देशों के शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए लाया गया है। इसके अलावा इन तीन देशों से भारत आए मुस्लिमों या फिर अन्य विदेशी नागरिकों के लिए यह कानून नहीं है। बिना वैध दस्तावेज के भी भारत में रह रहे इन लोगों को नागरिकता (संशोधन) कानून 2019 की मदद से भारत में स्थायी रूप से रहने में मदद मिलेगी। अब तक भारत की नागरिकता पाने के लिए इस तरह के लोगों को भारत में 12 साल तक रहना जरूरी था, जिसे अब कम करके छह साल कर दिया गया है। नागरिकता (संशोधन) कानून का भारतीय नागरिकों से किसी भी तरह से कोई लेना-देना नहीं है। भारतीय नागरिकों को संविधान में जो मूल अधिकार मिले हैं, उस पर कोई खतरा नहीं है। नागरिकता संशोधन कानून के चलते जो विरोध की आवाज उठी उसकी वजह ये है कि इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं। सीएए को लेकर एक धारणा बन गई है कि इससे भारतीय मुस्लिम अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे, लेकिन सच यह है कि ऐसा करना चाहें तो भी इस कानून के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है। दरअसल, सीएए को देशभर में प्रस्तावित एनआरसी से जोड़कर देखा जा रहा है, इसलिए ऐसी धारणा बनी है। सीएए को लेकर देशभर में अभी जो विरोध हो रहा है वह दो तरह की आशंकाओं से प्रेरित है। वहीं, भारत के अन्य क्षेत्रों मसलन केरल, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सीएए का विरोध इसमें मुस्लिमों को शामिल नहीं किए जाने को लेकर हो रहा है। उनका मानना है कि यह संविधान के विरुद्ध है।

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