स्वयं को संगठन से क्यों जोड़े?

प्रदेश मंत्री नीलेश सोनी भोपाल
संगठन में – नियम नहीं, व्यवस्था होती है
संगठन में – सूचना नहीं, समझ होती है
संगठन में – क़ानून नहीं, अनुशासन होता है
संगठन में – भय नहीं, भरोसा होता है
संगठन में – शोषण नहीं, पोषण होता है
संगठन में – आग्रह नहीं, आदर होता है
संगठन में – संपर्क नहीं, सम्बन्ध होता है
संगठन में – अर्पण नहीं, समर्पण होता है
संगठन में – मैं “नहीं “हम” होता है
संगठन में- आत्मप्रशंसा” नहीं “सर्व सम्मान” होता है।
संगठन में- तोड़ना नहीं, जोड़ना होता है।

इसलिए स्वयं को संगठन से जोड़े रखें।

संगठन सामूहिक हित के लिए होता है, व्यक्तिगत “स्पर्धा” और “स्वार्थ” के लिए नहीं।

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