पत्रकार एवं प्रेस फोटोग्राफरो को जारी हो शासकीय परिचय पत्र

समाजसेवी अधिमान्य पत्रकार महासंघ की मांग सभी आये दिन पत्रकारों पर फर्जी होने के आरोप लगते रहते है कई बार देखने मे आता है कि जो समाचार पत्र बंद हो चुके है उनके भी आई कार्ड चलन मे होते है।पत्रकार होने की पुष्ट भी जिले का सूचना विभाग नही कर सकता।कई बार समाचार पत्रों व न्यूज चैनलो के सम्पादको के द्वारा लेटर तो जारी किये जाते है किन्तु उनकी सेवा समाप्ति का या हटाये जाने का लेटर जारी नहीं किया जाता।
समाजसेवी अधिमान्य पत्रकार महासंघ की एक बैठक में इस विषय को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी। समाजसेवी अधिमान्य पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष दिल मांगे ने जब इसका हल उपस्थित सभी पत्रकारो से जानना चाहा तो सभी ने एकमत होकर इसका समर्थन किया कि देश मे सभी पत्रकारो को सरकार द्वारा ही परिचय पत्र मिलने चाहिए। फिर चाहे वह श्रमजीवी पत्रकार हो या ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा हुआ पत्रकार हो। इससे वास्तविकता मे पत्रकारिता कर रहे लोगो के ही परिचय पत्र जारी हो पायेगे।
इसी के साथ सरकार आरएनआई की तरह ही न्यूज पोर्टलों के भी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करे।जिससे डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार भी निर्भीक होकर पत्रकारिता कर सके।
इस विषय पर लाइव 24 न्यूज चैनल के एमडी प्रमोद ठाकुर ने कहा कि आज देश मे डिजिटल मीडिया बहुत तेजी से बढ रही है और सरकार द्वारा अभी तक कोई नियमावली इसको लेकर नही आई है।इसकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने से डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार भी प्रेस एक्ट के दायरे मे रहकर ही काम करेगे और फर्जी खबरे वायरल होने से रूकेंगी। इस विषय पर ऑडिशन टाइम्स के ब्यूरो चीफ कपिल यादव ने कहा कि देश में फर्जी पत्रकारों की लंबी लाइन है। जिससे यह तय नहीं हो पाता कि फर्जी और असली कौन है। सरकार को संस्थान द्वारा जारी लेटर के आधार पर एक सरकारी आई कार्ड बनाया जाए।जिससे पत्रकार प्रेस एक्ट के दायरे मे रहकर ही काम करेगे। दानिश जमाल ने कहा कि आज मेहनत से अपने कार्य को अंजाम देने के लिए बहुत दिक्कतो का सामना करना पडता है यही कारण है कि अधिकारी भी अपना वर्जन देने मे कतराते है।यदि सभी पत्रकारो को सरकार द्वारा जारी परिचय पत्र मिलेगा कि फर्जी होने के सबाल ही खत्म हो जायेगा। झारखंड के कुमार अभिषेक ने कहा कि न्यूज़ चैनलों व न्यूज़ पेपरों द्वारा जारी किए गए पत्रकार को कंपनी के द्वारा नियुक्ति किए जाने का प्रमाण पत्र तो दिया जाता है परंतु कंपनी द्वारा पत्रकार को हटाए जाने या छोड़ने का प्रमाण पत्र नहीं जारी किया जाता जिसके कारण कई बार कंपनी के द्वारा हटाए गए पत्रकार हमेशा की तरह अपने क्षेत्र में बने रहते हैं और कंपनी के द्वारा दिए गए आईडी कार्ड का दुरुपयोग करते हैं जिसका भुगतान कभी-कभी प्रमाणित पत्रकारों को भी भुगतना पड़ता है। ऐसे कारनामों पर लगाम लगाने हेतु सरकार के द्वारा हीं सभी पत्रकारों की नियुक्ति हो मनोनय पत्र दिया जाए।
वही इस विषय पर जनता की आवाज न्यूज़ पोर्टल के मण्डल प्रभारी महेश पाण्डेय ने कहा की आज के दौर में डिजिटल मीडिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें पत्रकार बंधु अपना भविष्य समझ कर काम कर रहे है।लेकिन सरकार द्वारा अभी तक डिजिटल मीडिया से सम्बंधित कोई भी नियमावली लेकर नहीँ आयी हैं सरकार को हमारी मांगो पर जल्द से विचार करने की आवश्यकता है।जिससे डिजिटल मीडिया को कार्य करने के लिए एक रास्ता मिले।
दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र वर्मा ने कहा कि सरकार डिजिटल मीडिया को बढावा दे रही है जल्द ही सरकार द्वारा एक नियमावली भी बनाई जाये जिसमे पत्रकारो की शैक्षिक योग्यता को भी ध्यान मे रखा जाये और प्रेस के लिए एक ही आईकार्ड सरकार द्वारा जारी किया जाये जिससे पत्रकारो व पत्रकारिता दोनो की गरिमा को बचाया जा सके।
जालंधर से अनवर अमृतसरी ने कहा कि आए दिन फर्जी पत्रकारों के कारण वास्तव में जो पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हैं उन्हें भी जांच जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ता है और बदनामी अलग होती है, जिससे समाज में अब पत्रकारों को उनका बनता सम्मान भी नहीं मिल रहा है, यह मांगें और सुझाव समय की मुख्य मांग है, निसंदेह अब तो आलम यह है कि समाचार पत्रों की भारी भीड़ में यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो गया है कि कौन-कौन से समाचार पत्र चालू हैं या कौन से बंद हो गए हैं इसलिए उसकी भी जांच हो, विशेष रूप से आई कार्ड्स को लेकर सरकारों को सचेत रहने की आवश्यकता है, ताकि उसका कोई भी दुरुपयोग न कर सके।

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