1.        सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया के सभी साथि‍यो के हितों की बात करना।

2.        पत्रकारों को न्याय दिलाना व उनके हितों की बात सरकार तक पहुँचाना।

3.        पत्रकारों के परिजनों को विशेष सम्मान दिलाना।

4.        पत्रकारों के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शैक्षणिक प्रशिक्षण विद्यालयों के माध्यमों से सुनिश्चित करना।

5.        पत्रकारों के बच्चों को आवश्यकतानुसार निःशुल्क शिक्षण का कार्य करना व कराना।

6.        पत्रकार हितों पर आवाज उठाना व पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ प्रजातांत्रिक तरीके से आवाज उठाना व पत्रकारों को न्याय दिलाना।

7.        पत्रकारों हेतु मीडिया शिक्षण संस्थान की स्थापना करना व पत्रकारों को     मीडिया से जुड़े कर्तव्य का शिक्षण-प्रशिक्षण प्रदान करना।

8.        पत्रकारों से जुड़ी हर समस्याओं को राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर उठाना तथा शोषण मुक्त वातावरण तैयार करना।

9.        समाचार पत्र पत्रिकाओं, न्यूज एजेंसी व चैनलों के लिए आसान कारगर नीति बनवाना केन्द्र सरकार, राज्य सरकार से मधुर सम्बन्ध स्थापित करना व करवाना।

10.      मीडिया संस्थानों एवं पत्रकारों को उनके बेहतर कार्यो के लिए हर वर्ष अवार्ड व सम्मान समारोह करना।

11.      पत्रकारों के कल्याण व लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ की रक्षा सुरक्षा करना।

12.      पत्रकारों को डर व उत्पीड़न से मुक्त वातावरण तैयार करना।

13.      पत्रकार हितों के आवाज को मुखर बनाना।

14.      समाज सेवी कार्यक्रम आयोजित करना।

15.      पुलिस जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, सफाई जागरूकता अभियान, साईबर क्राईम जागरूकता अभियान चलाना।

16.      धार्मिक, सांस्कृतिक, खेेलकूद जैसे कार्यक्रम आयोजित करना।

17.      पत्रकारिता के माध्यम से लोगो को राष्ट्र प्रेम, स्वदेशी एवं समरसता का      भाव जागृत करना।

18.      अनाथ, बेसहारा एवं विकलांग पुर्नवास की व्यवस्था करना तथा महिलाओं को कानूनी सहायता एवं सामाजिक न्याय दिलाना।

19.      प्राकृतिक आपदा, बाढ़, अकाल, महामारी, भूकम्प आदि के प्रभावित क्षेत्रों में जाकर चिकित्सा व्यवस्था एवं हर सम्भव सहायता करना तथा इस हेतु एक हेल्पेज फंड की व्यवस्था करना।

20.      धमार्थ चिकित्सालयों, प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग केन्द्रों की स्थापना एवं उनका संचालन करना।

21.      सांस्कृतिक क्षेत्र में स्कूल, संस्कार केन्द्र, बाल वाटिकाओं, पुस्तकालय एवं वाचनालयों की व्यवस्था कर लोगों में ज्ञान का प्रसार करना।

समाजसेवी अधिमान्‍य पत्रकार महासंघ से जुडने से क्‍या लाभ

मौजूदा दौर में ज़मीन पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की समस्याएं बढ़ी हैं। उनके ऊपर मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। सत्ता में बैठे लोग मीडिया को सिर्फ़ अपने प्रचार-प्रसार का माध्यम समझ रहे हैं। इस कठोर समय में पत्रकार संगठनों की आवाज़ भी कमज़ोर पड़ रही है।

 नागरिकों के हित में और सरकारी गड़बड़ी के ख़िलाफ़ ख़बरें लिखने और दिखाने पर मीडियाकर्मियों पर क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है। सत्ता में बैठे लोग मीडिया को सिर्फ़ अपने प्रचार-प्रसार का माध्यम समझ रहे हैं। इस कठोर समय में पत्रकार संगठनों की आवाज़ भी कमज़ोर पड़ रही है। ऐसे में सत्ता से सवाल करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता जा रहा है।

ज़िले में काम कर रहे संवाददाताओं पर स्थानीय प्रशासन दबाव बनाकर ख़बरें रुकवाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में कई प्रश्न उठ रहे हैं? क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था बिना सशक्त मीडिया के सम्भव है? प्रदेश के विभिन हिस्सों से पत्रकारों के  ख़िलाफ़ कार्रवाई की ख़बरें आ रही हैं,लेकिन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? ऐसे हालात में क्या भविष्य में स्वतंत्र पत्रकारिता संभव है?

मनुष्य के जीवन में संगठन का बड़ा महत्व है। अकेला मनुष्य शक्तिहीन है, जबकि संगठित होने पर उसमें शक्ति आ जाती है। संगठन की शक्ति से मनुष्य बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से कर सकता है। संगठन में ही मनुष्य की सभी समस्याओं का हल है। जो परिवार और समाज संगठित होता है वहां हमेशा खुशियां और शांति बनी रहती है और ऐसा देश तरक्की के नित नए सोपान तय करता है। इसके विपरीत जो परिवार और समाज असंगठित होता है वहां आए दिन किसी न किसी बात पर कलह होती रहती है जिससे वहां हमेशा अशांति का माहौल बना रखता है।

संगठित परिवार, समाज और देश का कोई भी दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जबकि असंगठित होने पर दुश्मन जब चाहे आप पर हावी हो सकता है। संगठन का प्रत्येक क्षेत्र में विशेष महत्व होता है, जबकि बिखराव किसी भी क्षेत्र में अच्छा नहीं होता है। संगठन का मार्ग ही मनुष्य की विजय का मार्ग है। यदि मनुष्य किसी गलत उद्देश्य के लिए संगठित हो रहा है तो ऐसा संगठन अभिशाप है, जबकि किसी अच्छे कार्य के लिए संगठन वरदान साबित होता है। प्रत्येक धर्म ग्रंथ संगठन और एकता का संदेश देते हैं। कोई भी धर्म आपस में बैर करना नहीं सिखाता। सभी धर्मों में कहा गया है कि मनुष्य को परस्पर प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना चाहिए। मनुष्य जब एकमत होकर कार्य करता है तो संपन्नता और प्रगति को प्राप्त करता है। संगठन में प्रत्येक व्यक्ति का विशेष महत्व होता है इसलिए जब मनुष्य संगठित होकर कोई कार्य करता है तो उसके परिणाम में विविधता देखने को मिलती है। जिस तरह प्रत्येक फूल अपनी-अपनी विशेषता और विविधता से किसी बगीचे को सुंदर व आकर्षित बना देते हैं उसी तरह मनुष्य भी अपनी-अपनी विशेषता और योग्यता से किसी भी कार्य को नया आयाम प्रदान कर सकते हैं।

यह भी संभव नहीं है कि किसी विषय पर सभी व्यक्तियों का मत एक जैसा ही हो, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति किसी विषय या समस्या को अपने नजरिये से ही देखता है और इसी आधार पर उसका समाधान भी खोजता है, लेकिन जब बात संगठन की आती है तब मनुष्य को वही करना चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों का भला हो। संगठन में प्रत्येक मनुष्य को अपनी व्यक्तिगत भावनाओं पर नियंत्रण करना होता है इसलिए संगठन में व्यक्ति को शारीरिक तौर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक व बौद्धिक रूप से भी समर्पित होना पड़ता है।

*अनिल मालवीय, संपादक, गौभूमि समाचार*

*अध्‍यक्ष, समाजसेवी अधिमान्‍य पत्रकार महासंघ*