परिचय

Welcome

The Samajsewi Adhimanya Patrakar MahaSangh is working and fighting to protect for freedom of expression, under the valuable guidance of
Mr. Anil Malviya Journalist since last more than 5 years.


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Samajsewi Adhimanya Patrakar MahaSangh (APMS) the flagship of Journalists Federation of India is fighting cesslessly for the Journalists Welfare, rights of media worldwide/from last 5 years, and also working for professional development for Writers, Editors, Journalists, Publishers, Correspondents, Reporters, Freelance writers, Public Relations Professionals, Photographers and other persons/individuals/organization serving in the field of media sector. Non-Profit Organization venture among independent producers and distributors.


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For Raising the standards of journalists we are in Organizing seminars, bringing coaching to journalists who needs feedback & training to increase their proficiency in the industry, dedicated to defending, protects, improves the rights and safety of the journalists & promotion of the media freedom world-wide. Protects and improves the rights of journalists intellectuals & writers, tallies attack on journalists & documents the worst places to be the journalist.

Samajsewi Adhimanya Patrakar Mahasangh represent journalists in all sectors of media. The Journalism scene is increasingly dominated by the impact of media concentration and the influence of powerful media conglomerates around the world, there are concerns about attempts to loosen media ownership controls and there is gowing concern for the future of the powerful tradition of public service broadcasting.

The work of the APMS has focused on the development of independent and quality journalism in support of democratic, social and economic development, under the flagship of Samajsewi Adhimanya Patrakar Mahasangh.

Samajsewi Adhimanya Patrakar Mahasangh activites are articulated among the following priorities:
* Addressing democratic change, public accountability and Globalization issues.
* Strengthening independent journalist trade unions, that are best able to defend media freedom and public scrutiny.
* Advancing the respect for international standards of media/ press freedom. * Raising the professional status of journalists.
* Safty and human rights. To encourage a climate in which journalism can be practiced freely.
* Quality journalism: improving professional and ethical standards. To stimulate high standards and ethical behavior in the practice of journalism.
* Press Freedom. To maintain constant vigilance in protection/ guarantees of freedom of speech and of the press.
* Public service broadcasting.
* Gender equity.
* Developing resources. To inspire successive generations of talented individuals to become dedicated journalists. To encourage diversity in journalism.
* Conducting workshops and seminars. To foster excellence among journalists.
* To promote this flow of information.To be the pre-eminent, broad based membership organisation for journalists.

समाजसेवी अधिमान्‍य पत्रकार महासंघ

समाजसेवी अधिमान्‍य पत्रकार महासंघ की भारत सरकार एवं सभी राज्य सरकारो से पत्रकारो की सुरक्षा हेतु। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए “पत्रकार सुरक्षा कानून” की मांग।

”दुनिया के कई देशों में पत्रकार सुरक्षा कानून बने हैं, जो पत्रकारों को सही और सच्ची खबर लाने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन भारत आज भी पत्रकार सुरक्षा कानून से वंचित है। अत: सरकार भारत में तुरंत प्रभाव से “पत्रकार सुरक्षा कानून” निर्माण व लागू करे।”

“कानूनी सुरक्षा” हेतु :-

1- “पत्रकार सुरक्षा कानून” अविलम्ब लागू हो।
2- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर कवरेज के दौरान हमले को विषेश कानून के तहत दर्ज किया जाए।
3- पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज करने से रोकने को सरकारी काम में बाधा की तरह देखा जाए।4- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामलों की पहले स्पेशल सेल के तहत जांच की जाए, मामले की पुष्टि होने पर ही केस दर्ज किया जाए।
5- पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामले की जांच के लिये कम से कम पीसीएस या आईपीएस अधिकारी द्वारा जांच हो।
6- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी पर झूठा मामला दर्ज किया जाता है और उसकी पुष्टि होती है तो झूठा मुकदमा करने वालों के खिलाफ आजीवन कारावास और अधिकतम जुर्माने का प्रावधान हो।
7- पत्रकार/मीडियाकर्मी की हत्या को रेयरेस्ट क्राइम के अंतर्गत रखा जाए।
8- पत्रकार/मीडियाकर्मी की कवरेज के दौरान दुर्घटना या मृत्यू होने पर नि:शुल्क बीमा प्रदान किया जाए।
9- कवरेज के दौरान घायल हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी का इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।
10- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी के परिजनो पर रंजिशन हमला किया जाता है तो उनका इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।
11- कवरेज के दौरान अथवा किसी मिशन पर काम करते हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए।
12- पत्रकार/मीडियाकर्मी को आत्म सुरक्षा हेतु लाइसेंस इश्यू किया जाए।
13- सभी पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज के लिये राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए।
14- प्रशासनिक व विभागीय बैठकों में पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य हो।
15- पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज हेतु आवागमन के लिये आधे किराये का प्रावधान हो, तथा रेलवे में यात्रा के लिये शीघ्र आरक्षण का प्रावधान हो।
16- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये टोल टैक्स में छूट प्रदान की जाए।
17- यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी को धमकियां मिले तो उसकी सुनवाई शीघ्र हो तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

सामाजिक सुरक्षा हेतु :-

1- राज्य एवं केन्द्र के स्तर पर “पत्रकार आर्थिक सुरक्षा निधि” योजना का संचालन हो।
2- 10,000 का नि:शुल्क बीमा सुनिश्चित हो।
3- गम्भीर बीमारी की स्थिति में अच्छे अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था हो।
4- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना हो।
4- पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना हो।
5- जिस तरह किसान ऋण योजना है उसी प्रकार पत्रकार/मीडियाकर्मियो हेतु ऋण योजना बैंको द्वारा संचालित हो।
6- पत्रकार/मीडियाकर्मियों हेतु कार्यालय योजना हो जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर कार्यालय उपलब्ध हों।
7- प्रिंटिंग प्रेस लगाने हेतु विषेश पैकेज व्यवस्था हो तथा प्रिंटिंग प्रेस पर आयत शुल्क में रियायत हो।8- पत्रकार/मीडियाकर्मियों के बच्चों के लिये अच्छे शिक्षण संस्थानों में कोटा हो अथवा उनकी फीस में रियायत हो।
9- पत्रकार/मीडियाकर्मी हेतु आवास योजना हो, जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर आवास उपलब्ध हों।

जब तक लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकार/मीडियाकर्मी की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक किस तरह एक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना की जा सकती है और किस तरह भारत विश्व में निष्पक्ष भयहीन और स्वतंत्र मीडिया होने का दम्भ भर सकता है। जल्द से जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए।

जो पत्रकार भाई हमारी इन मांगो से सहमत है। वो समाजसेवी अधिमान्‍य पत्रकार महासंघ से जुड़ें।
ताकि पत्रकार अपनी ताक़त शासन/ प्रशासन राज्य एवं केंद्र सरकार को दिखाकर इस क़ानून को पास करा सकें।

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